
ताहिर खान गाना गाते हुए।
22 मई 23, मुरादाबाद। लोहे की ठक-ठक के बीच रोजगार तलाशने वाले बिलारी के राजा का सहसपुर के रहने वाले ताहिर खान ने सुरीली आवाज का जादू बिखेरा है। फिल्मी दुनिया के जन्मदाता माने जाने वाले दादा साहब फाल्के फिल्म फाउंडेशन में ताहिर खान ने अपनी सुरीली आवाज से प्रवेश कर लिया है। इस पुरस्कार के साथ वह दादा साहब फाल्के फिल्म फाउंडेशन के परिवार का हिस्सा हो गए हैं और अब उनके लिए फिल्मों में गाने का रास्ता भी खुल गया है।

लोहे की ठक-ठक से आवाज का सफर
जिले की तहसील बिलारी के राजा के सहसपुर रहने वाले ताहिर खान का परिवार साधारण है। पिता की लोहे की दुकान है और ताहिर भी लोहे की ठक-ठक के बीच अपना रोजगार तलाश रहे थे। गाने के शौकीन ताहिर खान को रास्ता मिला एफएम स्टार एप से। इसी एप पर गाने गाकर वह मुंबई तक पहुंचे और दादा साहब फाल्के फिल्म फाउंडेशन में प्रवेश मिला। यहां उन्होंने नफीस आलम का लिखा गाना पेश किया। फाउंडेशन ने शानदार आवाज के जिन आठ लोगों का चयन करके सम्मानित किया है उसमें ताहिर खान भी शामिल हैं।

बकौल ताहिर-इस उपलब्धि से बेहद खुश हूं और यही मेरे फिल्मी दुनिया में प्रवेश का प्लेटफार्म है। वह बताते हैं कि उन्हें बगैर संघर्ष करके यह मुकाम मिला है सिर्फ आवाज की वजह है। फाउंडेशन के गायकों को फिल्म निर्माता गायकों का चयन करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि वह जल्दी ही फिल्मों में गीत गाएंगे।