आध्यात्मिक चेतना और साहित्यिक नवसृजन: गीता के उपदेशों से लेकर सलेम की आधुनिक कविताओं तक

वर्तमान समय में, जिसे शास्त्रों में कलयुग की संज्ञा दी गई है, भगवान श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन की प्रासंगिकता और भी अधिक बढ़ जाती है। श्रीकृष्ण केवल एक देवता ही नहीं, बल्कि कर्म करने की प्रेरणा देने वाले एक महान मार्गदर्शक हैं। उनके मुख से निकली श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक आज भी मानवता को जीवन की गहराइयों का अहसास कराते हैं। माना जाता है कि दुनिया के सबसे प्रभावशाली दार्शनिक ग्रंथों में से एक गीता है, और इसी संदर्भ में जन्माष्टमी जैसे पावन अवसरों पर इसके चुनिंदा श्लोकों का मनन करना जीवन को नई दिशा दे सकता है।

कर्म और फल का सिद्धांत

गीता के समुंदर से अगर हम मोतियों को चुनें, तो कुछ श्लोक ऐसे हैं जो सीधे मनुष्य के कर्तव्य-बोध को जागृत करते हैं। इनमें सबसे प्रमुख है द्वितीय अध्याय का 47वां श्लोक, जो कर्मयोग का आधार है। इसका भाव यह है कि व्यक्ति का अधिकार केवल कर्म करने पर है, उसके फलों पर नहीं। श्रीकृष्ण स्पष्ट करते हैं कि कर्मफल का हेतु मत बनो और न ही अकर्मण्यता (कर्म न करने) में तुम्हारी आसक्ति होनी चाहिए। यह संदेश आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहां मनुष्य अक्सर परिणाम की चिंता में अपने वर्तमान कर्म को दूषित कर लेता है।

संघर्ष और विजय का आह्वान

इसी कड़ी में, जीवन के कुरुक्षेत्र में हताश हो चुके व्यक्ति के लिए द्वितीय अध्याय का 37वां श्लोक एक संजीवनी की तरह है। जब अर्जुन युद्ध से विमुख हो रहे थे, तब श्रीकृष्ण ने उन्हें ललकारते हुए कहा था, “हे कौन्तेय! निश्चय करके युद्ध करो।” उनका तर्क था कि यदि तुम इस धर्मयुद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए, तो तुम्हें स्वर्ग मिलेगा और यदि विजयी हुए, तो पृथ्वी के सुख भोगोगे। इसलिए, उठो और दृढ़ निश्चय के साथ अपने कर्तव्य का पालन करो। यह उपदेश केवल युद्धभूमि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर उस व्यक्ति के लिए है जो अपने जीवन की चुनौतियों से पलायन करना चाहता है।

साहित्यिक जगत में नई गूंज: ‘पोएट इन हाई स्ट्रीट पार्क’

जहाँ एक ओर प्राचीन ज्ञान हमें जीवन जीने की कला सिखाता है, वहीं दूसरी ओर समकालीन साहित्य हमारे आस-पास के समाज और आज की वास्तविकताओं का दर्पण होता है। इसी तर्ज पर साहित्यिक गतिविधियों में भी एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। ‘पेम रीड्स’ (PEM Reads) समुदाय एक विशेष पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के लिए तैयार है, जो साहित्य प्रेमियों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं होगा।

सलेम के जीवन की झलक

इस आयोजन में सलेम के पहले ‘पोएट लॉरेट’ जे.डी. स्क्रिमगॉर अपनी नई कृति, “पोएट इन हाई स्ट्रीट पार्क: प्रोज एंड पोएट्री फॉर मॉडर्न सलेम” (Poet in High Street Park: Prose & Poetry for Modern Salem) के अंश प्रस्तुत करेंगे। यह पुस्तक केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि सलेम शहर के प्रति लेखक का एक प्रेम गीत है। जे.डी. स्क्रिमगॉर ने पिछले 30 वर्षों में इस शहर में रहते हुए जो कुछ भी अनुभव किया, उसे शब्द दिए हैं। खेल के मैदानों से लेकर कक्षाओं और बॉलफील्ड्स तक, उन्होंने रोजमर्रा की सच्चाइयों को अपनी लेखनी से जमीन पर उतारा है।

कार्यक्रम की मेजबानी पेम (PEM) के लर्निंग और कम्युनिटी एंगेजमेंट के निदेशक डेविड स्नाइडर करेंगे। वे लेखक के साथ एक संवाद सत्र का संचालन करेंगे, जिससे पाठकों को रचना प्रक्रिया की बारीकियों को समझने का मौका मिलेगा। इस सत्र के बाद एक हल्का रिसेप्शन और पुस्तक हस्ताक्षर का कार्यक्रम भी होगा। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि चाहे वह गीता का प्राचीन ज्ञान हो या आधुनिक सलेम की कविताएं, शब्द हमेशा से ही मानव अनुभव को समृद्ध करने का सबसे सशक्त माध्यम रहे हैं।